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क्या आयुर्वेदिक दवाओं के निर्माण के लिए कोई नियम है?

भारत में ड्रग और कॉस्मेटिक अधिनियम के माध्यम से आयुर्वेदिक दवाओं को विनियमित किया जाता है। आयुर्वेदिक दवाओं के व्यापार से संबंधित विनिर्माण को इस अधिनियम के तहत विनियमित किया जाता है जिसमें निर्माताओं को प्रक्रिया शुरू करने से पहले राज्य औषधि नियंत्रण प्राधिकरण से लाइसेंस लेना होता है। खुदरा विक्रेताओं को आयुर्वेदिक दवाएं उपलब्ध कराने के लिए एक आयुर्वेदिक फार्मेसी चलाने के लिए लाइसेंस लिया जाता है। दवाओं की गुणवत्ता का परीक्षण करने वाली केंद्र सरकार के तहत फार्माकोपोरियल लेबोरेटरी फॉर इंडियन मेडिसिन (PLIM) और होम्योपैथिक फार्माकोपिया लेबोरेटरी जैसे प्राधिकरण हैं।

राज्य का अधिकार इन दवाओं के निर्माण की जांच करना है, चाहे वे शास्त्रीय हों या पेटेंट मालिकाना। निर्माताओं को इन दवाओं का व्यावसायिक रूप से निर्माण शुरू करने के लिए संबंधित प्राधिकरण से हरी बत्ती प्राप्त करनी होगी।

Last updated on जून 4th, 2021 at 05:54 अपराह्न